सवाल चुप, जबाब उदास है
ज़माना बिंदास है
ज़मीन से बरकते हुए
कोई ज़मीन गढ़ रहा है
यह ज़माना एक अजीब
किताब पढ़ रहा है
फ़ुरसत किसे है
पुरानी बात दोहराने की
हर जगह बिछे बिस्तर मिलते हैं
जरुरत नहीं आशियाँ सजाने की
हर जगह घरों के टुकड़े हैं
रिस्ते टूटे बर्तनों की तरह बिखरे है
उत्तर -आधुनिकता में इतने निखरे है
कि साबुत कुछ भी नहीं बचा
मूल्यहीन जिंदगी तुम्हारी क्या खता?
संस्कृति की खोल में बंद थी
अब नंगी होकर बाहर आ रही हो
लगता है ग्लोबल होती जा रही हो
अब आदमी काफी उदार है
क्योंकि सामने बाज़ार हैं
सरकार को जिसका इंतजार है ।
ज़माना बिंदास है
ज़मीन से बरकते हुए
कोई ज़मीन गढ़ रहा है
यह ज़माना एक अजीब
किताब पढ़ रहा है
फ़ुरसत किसे है
पुरानी बात दोहराने की
हर जगह बिछे बिस्तर मिलते हैं
जरुरत नहीं आशियाँ सजाने की
हर जगह घरों के टुकड़े हैं
रिस्ते टूटे बर्तनों की तरह बिखरे है
उत्तर -आधुनिकता में इतने निखरे है
कि साबुत कुछ भी नहीं बचा
मूल्यहीन जिंदगी तुम्हारी क्या खता?
संस्कृति की खोल में बंद थी
अब नंगी होकर बाहर आ रही हो
लगता है ग्लोबल होती जा रही हो
अब आदमी काफी उदार है
क्योंकि सामने बाज़ार हैं
सरकार को जिसका इंतजार है ।
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