Friday, 10 January 2014

हॉस्पिटल में पैदा हुआ
तबादले की मार सहता हुआ
किराये के घरों में रहा
होटलों में जन्मदिन से लेकर
विवाह ,तलाक ,पुण्यतिथि मनाता रहा
पंद्रह अगस्त ,छब्बीस जनवरी पर
जन-गण ,मन -गण गाता रहा
भारतमाता के जोरदार नारे लगता रहा
 सरकारी मुलाजिम का वेतन पाता रहा
बच्चों को पार्क में घुमाता रहा
जिंदगी में खुद को भुलाता रहा
दोस्तों से ग़मे -शिकवा गाता रहा
बेबुनियाद का पिकनिक मनाता रहा
कभी अस्पताल ,कभी दुकान , कभी मंदिर
बैंक से लेकर दफ्तर जाता रहा
सरकारी फरमान बजाता रहा
इसी तरह जिंदगी के अरमान सजाता रहा
आज इस उम्र के पर हूँ
खुद में नागवार हूँ
आज जिंदगी दवा पर चल रही है
जैसे सरकार किसी हवा पर चल रही है
हॉस्पिटल के बिस्तर पर साँस गिन रहा हूँ
यहीं पैदा हुआ था
आज यहीं छीन रहा हूँ
अब तो योजनाओं में विकास है
न खुश है न उदास है
भाई साहब मिडिल क्लास है ।

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