Tuesday, 14 January 2014

कॉमरेड तुम बात सही कहते हो
किन्तु उस पर लाल रंग पोत देते हो
यहाँ तक कि मियां बीबी के झगड़े में भी
वर्ग -संघर्ष जोत देते हो
तुम्हारी आँखें पुरानी हैं
और चश्में भी पुराने हैं
यह नया दौर है
नए ज़माने हैं
बुर्जुआ राख है पूँजीपति हरा है
सर्वहारा देता पहरा है
बाज़ार के चकमक में
जगमग जगमग भरा है
शोषित कौन है और शोषक कौन है
यह बताना मुश्किल है खोल में
रजाई कौन है और तोसक कौन है
अब तो मौका मिलने की देर है
मालिक भी  ठगता है
मजदूर भी ठगता है
फिर भी तुमको एक शोषक
और दूसरा शोषित लगता है
अभी तुम उत्पादन और वितरण में भूल रहे हो
सरप्लस वैल्यू में झूल रहे हो
अपनी आइडियोलॉजी में बेहद खुश हो
क्योंकि दिमाग में पाले  एक रूस हो
हर मंदी के बाद अमेरिका ढहता है
हर कॉमरेड यही कहता है
पुंजीवाद बहुत बड़ा धोखा है
मार्क्सवाद चटनी और चोखा है
रोजी -रोटी गायब है
यह तरीका बड़ा नायब है
हिलते रहो हिलाते रहो
पानी मार -मार कर
क्रांति की आग जिलाते रहो
इंकलाब गाते रहो ।
  ---------अनिल कुमार शर्मा

No comments:

Post a Comment