खुले दरवाजे पर दस्तक दिया
वह बंद हो गया
उदार आदमी भी
अब इतना तंग हो गया
सवाल के सामने सवाल
और जबाब के सामने जबाब
मैदाने जंग हो गया
आदमी की फितरत में
खुला कलेजा बंद हो गया
किताबें खोलता हूँ
चमक आती है उम्मीद जगती है
जैसे तेज तूफान में
कोई ढिबरी जलती है
वह बंद दरवाजा खुलता है
उसका साँकल फिर
बंद होने के लिए झूलता है
वह बंद हो गया
उदार आदमी भी
अब इतना तंग हो गया
सवाल के सामने सवाल
और जबाब के सामने जबाब
मैदाने जंग हो गया
आदमी की फितरत में
खुला कलेजा बंद हो गया
किताबें खोलता हूँ
चमक आती है उम्मीद जगती है
जैसे तेज तूफान में
कोई ढिबरी जलती है
वह बंद दरवाजा खुलता है
उसका साँकल फिर
बंद होने के लिए झूलता है
No comments:
Post a Comment