Saturday, 11 January 2014

खुले दरवाजे पर दस्तक दिया
वह बंद हो गया
उदार आदमी भी
अब इतना तंग हो गया
सवाल के सामने सवाल
और जबाब के सामने जबाब
मैदाने जंग हो गया
आदमी की फितरत में
खुला कलेजा बंद हो गया
किताबें खोलता हूँ
चमक आती है उम्मीद जगती है
जैसे तेज तूफान में
कोई ढिबरी जलती है
वह बंद दरवाजा खुलता है
उसका साँकल फिर
बंद होने के लिए झूलता है

No comments:

Post a Comment