Monday, 13 January 2014

दिल्ली हिली , कुछ आम आदमी में मिली
कुछ पानी मुफ्त है कुछ रियायत में बिजली
घूसखोरों के कुछ कान खड़े है
यही कुछ भ्रष्टाचार की   जड़े है
बात यही है कि अपने  घरों की गन्दगी
रास्ते में   फ़ेंक कर उसपर चलते है
अपने दरवाजे पर फिसलते है
अधिकार की बात पर उछलते है
कर्तव्य की बात पर
पतली गली से सरकते हैं
अब वोट लैपटॉप है ,बिजली है , पानी है
मतदाता याचक , पार्टी दानी है
अब जनतंत्र की यही कहानी है
निरीह आदमी के पास एक वोट  है
सत्ता पर करता चोट है
यह आदमी कभी जनता होता है
तो कभी नेता होता है
कभी लेता होता है
तो कभी देता होता है
कभी दुत्कारा होता है
तो कभी चहेता होता है
कभी सिंहासन पर तो कभी
नंगे सड़क पर लेटा होता है
कभी बाप होता है
तो कभी बेटा होता है
अपने देश की किस्मत क्या कहें
देश वाला देश पर रोता होता है ।
          -----------अनिल कुमार शर्मा
       ग़ाज़ीपुर   



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