तुम फूल की तरह हंसती हो
मैं कांटो की तरह चुभता हूँ
तुम कविता की तरह गूंजती हो
मैं किसी गद्य की तरह ऊबता हूँ
तुम शीतल चांदनी की तरह फैलती हो
मैं गरम सूरज की तरह डूबता हूँ
हवा की खुशबू में तुम्हारी महक मिलती है
पक्षी के चहकने में तुम्हारी चहक मिलती है
अँधेरे में रोशनी सी तुम्हारी झलक मिलती है
भोर में जैसे कोई चम्पा की कली खिलती है
मंद समीर सी जब तुम्हारी स्पर्श मिलती है
जैसे तपती धरती पर बारिश की बूँद गिरती है
और आकाश में सावन की घटा घिरती है
स्वाति की बूँद जैसे पपीहा को मिलती है
सीप में जैसे कोई मोती बनती है
दिल में गीत की तरह तुम बजती हो
वीरान में किसी बाग सी सजती हो
अनिल कुमार शर्मा
09/06/2016
मैं कांटो की तरह चुभता हूँ
तुम कविता की तरह गूंजती हो
मैं किसी गद्य की तरह ऊबता हूँ
तुम शीतल चांदनी की तरह फैलती हो
मैं गरम सूरज की तरह डूबता हूँ
हवा की खुशबू में तुम्हारी महक मिलती है
पक्षी के चहकने में तुम्हारी चहक मिलती है
अँधेरे में रोशनी सी तुम्हारी झलक मिलती है
भोर में जैसे कोई चम्पा की कली खिलती है
मंद समीर सी जब तुम्हारी स्पर्श मिलती है
जैसे तपती धरती पर बारिश की बूँद गिरती है
और आकाश में सावन की घटा घिरती है
स्वाति की बूँद जैसे पपीहा को मिलती है
सीप में जैसे कोई मोती बनती है
दिल में गीत की तरह तुम बजती हो
वीरान में किसी बाग सी सजती हो
अनिल कुमार शर्मा
09/06/2016
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