यह देश लगभग सत्तर साल का बच्चा है
कुछ पका तो अभी कुछ कच्चा है
हमारी जाति का गुंडा
तुम्हारी जाति के गुंडे से अच्छा है
जनता जनता से कहती है
जनता जनता से सुनती है
मन ही मन बहुत कुछ गुनती है
अपनी जाति अपना जनादेश है
एक विचित्र बहुमत का सन्देश है
इसमें राधा और घनश्याम है
दुर्वासा और परशुराम है
शास्त्रों में ब्राह्मणवाद है
संविधान में दलितवाद है
मनुवादी और अम्वेडकरवादी है
कही पर तो आतंकवादी है
सहमे सहमे से गांधीवादी हैं
शहरो में पूंजीवादी हैं
जंगलों में नक्सलवादी हैं
संस्कृति उपभोक्तावादी है
सभ्यता अतिवादी हैं
संत हाईटेक हैं
कितने तो दिलफेंक है
इसी तरह हम बन रहे हैं
अपने सीने पर तीर की तरह तन रहे हैं
अनिल कुमार शर्मा
13/06/2016
कुछ पका तो अभी कुछ कच्चा है
हमारी जाति का गुंडा
तुम्हारी जाति के गुंडे से अच्छा है
जनता जनता से कहती है
जनता जनता से सुनती है
मन ही मन बहुत कुछ गुनती है
अपनी जाति अपना जनादेश है
एक विचित्र बहुमत का सन्देश है
इसमें राधा और घनश्याम है
दुर्वासा और परशुराम है
शास्त्रों में ब्राह्मणवाद है
संविधान में दलितवाद है
मनुवादी और अम्वेडकरवादी है
कही पर तो आतंकवादी है
सहमे सहमे से गांधीवादी हैं
शहरो में पूंजीवादी हैं
जंगलों में नक्सलवादी हैं
संस्कृति उपभोक्तावादी है
सभ्यता अतिवादी हैं
संत हाईटेक हैं
कितने तो दिलफेंक है
इसी तरह हम बन रहे हैं
अपने सीने पर तीर की तरह तन रहे हैं
अनिल कुमार शर्मा
13/06/2016
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