Monday, 27 June 2016

दुनिया का दुःख गाते जाओ
दुनिया का सुख पाते जाओ
नेता या धर्मात्मा कहलाओ
दूध से पत्थर को नहलाओ
बस अपना गाल बजाओ
स्वप्नों के कारोबारी
जटा या खद्दरधारी
रूप तेरा सरकारी
बाबा हो इच्छाधारी
दुःख की जनता मारी
साधू बना बनिया
योग का नचनिया
माया में  ठगिनिया
बुझा ज्ञान की अगिनिया
बेच रहा नून तेल धनिया
घर छोड़ भूमंडलीकरण अपनाओ
धरती को खालिस जहर बनाओ
पर्यावरण में प्रदुषण फैलाओ
और विकास का गाना गाओ
कृत्रिम जीवन में मौत बुलाओ
दुनिया का दुःख गाते जाओ
दुनिया का सुख पाते जाओ ।
अनिल कुमार शर्मा
28/06/2016


No comments:

Post a Comment