Monday, 2 June 2014

जबसे दूनो अंखिया क बउल भइल फ्यूज
रास्ता जपत चलेली प्लीज प्लीज एक्सक्यूज़
प्लीज प्लीज एक्सक्यूज़ जपत बस पर चढ़ली अकुता के
तौले ईगो बिटिया आइल हमरा के धकिया के
चिक्कन चिक्कन गाल लाल छींट क पहिनवा
बड़ी जोर से धकियावे एक त चले न तनिको हवा
हम कहली बाची होने जा खाली  बा सीट जनाना
एधिर कहाँ अइलू कुल्ह बाड़न मरदाना
आँख तरेरलस अगवा जाके भुसुराइल
अपनी जाने गरजलस बाकी बकरी अस मेमियाइल
बूढ़ा क्यों बक बक करता है ऑफ हुआ माइंड है
लइका को लइकी बुझता है पूरा पूरा ब्लाइंड है
ई कुञ्ज बिहारी क लाइन ह

No comments:

Post a Comment