एक महंगा आदमी है
और एक सस्ता है
एक और आदमी है
जो न तो महंगा है न ही सस्ता है
सिर्फ उसकी हालत खस्ता है
आँखे गीली है
जेब ढीली है
जिंदगी नीली -पीली है
सपने बुनता है
कुछ राहें चुनता है
समस्याओं की बरसात में
नमक के ढेले की तरह
रह रह कर घुलता है
किस्मत को कोसता है
बहुत दूर तक सोचता है
जिंदगी में जिंदगी को नोचता है
उसके कलेजे में कुछ कोंचता है
खुद रोते हुए दूसरों का आंसू पोछता है
उसकी जिन्दगी अजीब है
उसे इस अँधेरे में भी उम्मीद है
अनिल कुमार शर्मा 24/06/2014
और एक सस्ता है
एक और आदमी है
जो न तो महंगा है न ही सस्ता है
सिर्फ उसकी हालत खस्ता है
आँखे गीली है
जेब ढीली है
जिंदगी नीली -पीली है
सपने बुनता है
कुछ राहें चुनता है
समस्याओं की बरसात में
नमक के ढेले की तरह
रह रह कर घुलता है
किस्मत को कोसता है
बहुत दूर तक सोचता है
जिंदगी में जिंदगी को नोचता है
उसके कलेजे में कुछ कोंचता है
खुद रोते हुए दूसरों का आंसू पोछता है
उसकी जिन्दगी अजीब है
उसे इस अँधेरे में भी उम्मीद है
अनिल कुमार शर्मा 24/06/2014
No comments:
Post a Comment