Sunday, 15 June 2014

यह शहर है चोरों का
 घूसखोरों का लतखोरों का
जहाँ गंगा में गन्दी नाली बहती है
मंदिर के पीछे वेश्याएँ रहती है
जहाँ लड़की में मादा है
लड़को में नर आमादा है
यह देश काल का वादा है
नव युग का दादा है
पुलिस जहाँ की डरती है
गुंडे की ताकत बढ़ती है
नेता वैभव कीना है
अफसर बड़ा कमीना है
फिर भी जनता को जीना है
इसी जहर को पीना है
सड़को में खाई है
चेहरों पर झांई है
गाड़ी शीशे वाली है
गलियों में नाली है
हवेली खड़ी चमकती है
बदबू चहु ओर महकती है
कुछ कुत्ते है कुछ सूवर है
कुछ घूरे है कुछ घर है
कचरा और कबाड़ी है
कुछ गड्ढे है  कुछ झाड़ी है
जगह जगह सड़ता पानी है
ये शहर बड़ा खानदानी है
बिजली के खम्भे टूटे है
पेड़ जहाँ पर ठूँठे है
नक़्शे में हरियाली है
उकठे पेड़ों की डाली है
संस्कार जहाँ का खाली है
यह नगरी बड़ी निराली है
अनिल कुमार शर्मा
१६/०६/२०१४

No comments:

Post a Comment