Saturday, 7 June 2014

तुम कौन हो ?
मैं कौन हूँ ?
 तुम मोहब्बत के चादर से ढक देती हो
मैं नफ़रत के पंजे से फाड़ देता हूँ
तुम कौन हो ?
मैं कौन हूँ ?
सलीके से खोलती हो दरवाजे को तुम
मैं धड़ाक से कुण्डी मार देता हूँ
तुम कौन हो ?
मैं कौन हूँ ?
आँचल से ढक के लौ को जलाती हो तुम
पछुआ हवा मैं झोक देता हूँ
पुरवाई की स्वागत में तुम लीपती हो आँगन
चौखट पर खड़ा होकर मैं रोक देता हूँ
तुम कौन हो ?
मैं कौन हूँ ?
आँगन में तुलसी को सींचती हो तुम
गमले में कैक्टस मैं रोप देता हूँ
आस्था की सफेदी लगाती हो तुम
बुद्धि की कालिख मैं पोत देता हूँ
तुम कौन हो ?
मैं कौन हूँ ?
अनिल कुमार शर्मा  ०८/०६/२०१४/

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