उसके हाथों में कोई एक कहानी है
और उसके पास कुछ बेबस जवानी है
उसे कोई फर्क नहीं पड़ता इस ज़माने में
कितना बिगड़ जाता है कुछ बनाने में
अब तो आदमी की नस्ल को आदमी ही खाता है
जाने किस पेट में पचाता है
कहीं से कोई बंदूक घूमाता है
आदमी के हाथ से आदमी को गिराता है
इस आदमी की बेबसी वह आदमी है
जिसके कलेजे में आग आँखों में नमी है
बारूद के टीले पर आशियाना बनाता है
मौत के साये में जीना सिखाता है
एक अजीब रास्ता दिखाता है
जहाँ खून की नदी बहती है
अब ये लाशें कहती है
अनिल कुमार शर्मा
17/11/2015
और उसके पास कुछ बेबस जवानी है
उसे कोई फर्क नहीं पड़ता इस ज़माने में
कितना बिगड़ जाता है कुछ बनाने में
अब तो आदमी की नस्ल को आदमी ही खाता है
जाने किस पेट में पचाता है
कहीं से कोई बंदूक घूमाता है
आदमी के हाथ से आदमी को गिराता है
इस आदमी की बेबसी वह आदमी है
जिसके कलेजे में आग आँखों में नमी है
बारूद के टीले पर आशियाना बनाता है
मौत के साये में जीना सिखाता है
एक अजीब रास्ता दिखाता है
जहाँ खून की नदी बहती है
अब ये लाशें कहती है
अनिल कुमार शर्मा
17/11/2015
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