मेरे मित्र तुम क्या -क्या खाते हो
और क्या क्या पचाते हो
कुछ तो पच जाता होगा
कुछ बिना पचे बच जाता होगा
तुम्हारे आहारनाल में
धर्मों के खाद्य अखाद्य पचकर
क्या आत्मा तक पहुँच जाते है ?
गढ़े हुए परमात्मा को खुजलाते है ?
लोग इतना क्यों झुंझलाते है
थाली में बवाल मचाते है
भोजन , भजन और भाजन
चय में उपचय और पाचन
आहार- विहार में संहार
और वसुधैव कुटुम्बकम का संस्कार
सीना ठोंककर गाते है
मनुष्य से गिरकर मवेशी तक आते है
और नायं हन्ति न हन्यते बताते है
एक खास पशु की प्रतीति में
इंसान को मारते है काटते है
अंहिंसा परमोधर्मः बाँचते है
एक विचित्र विश्वास लादते है
धर्मपाश का सत्ता संधान
जिसमे भोजन और स्नान
बन जाता शास्त्र ज्ञान
जिसे लोक पर लादते रहो
और अपनी पोथी बाँचते रहो ।
अनिल कुमार शर्मा
06/11/2015
और क्या क्या पचाते हो
कुछ तो पच जाता होगा
कुछ बिना पचे बच जाता होगा
तुम्हारे आहारनाल में
धर्मों के खाद्य अखाद्य पचकर
क्या आत्मा तक पहुँच जाते है ?
गढ़े हुए परमात्मा को खुजलाते है ?
लोग इतना क्यों झुंझलाते है
थाली में बवाल मचाते है
भोजन , भजन और भाजन
चय में उपचय और पाचन
आहार- विहार में संहार
और वसुधैव कुटुम्बकम का संस्कार
सीना ठोंककर गाते है
मनुष्य से गिरकर मवेशी तक आते है
और नायं हन्ति न हन्यते बताते है
एक खास पशु की प्रतीति में
इंसान को मारते है काटते है
अंहिंसा परमोधर्मः बाँचते है
एक विचित्र विश्वास लादते है
धर्मपाश का सत्ता संधान
जिसमे भोजन और स्नान
बन जाता शास्त्र ज्ञान
जिसे लोक पर लादते रहो
और अपनी पोथी बाँचते रहो ।
अनिल कुमार शर्मा
06/11/2015
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