Monday, 15 August 2016

आज सत्तरवीं फसल कटी आज़ादी की
जय बोलो महात्मा ग़ांधी की
कुछ बाढ़ पीड़ित कुछ सूखे में
कुछ भरे पेट कुछ भूखे में
कुछ माल काटते चाँदी की
आज सत्तरवीं फसल कटी  आज़ादी की
सब झंडे डंडे का खेल रहा
किसको कौन ढकेल रहा
जन गण मन गण गाते गाते
अब नौबत आ गयी धक्काबाजी की
आज सत्तरवीं फसल कटी आज़ादी की
कोई नंगा भूखा सोया है
सूखी आँखों से रोया है
कोई सपनो में खोया है
अब राजनीती बन  गयी जनताबाजी की
आज सत्तरवीं फसल कतई आज़ादी की
दुनिया की रंगीनी में
चादर झीनी झीनी में
चलता चाल महीनी में
कुछ बातें बनी  विचित्र राष्ट्रबाज़ी  की
आज सत्तरवीं फसल कटी आज़ादी की
जय बोलो महात्मा गाँधी की
अनिल कुमार शर्मा
15/08/2016



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