अब बासी शब्दकोशों पर
फफूंद की तरह उगे छन्दों में
उलझी हुई कविता
दाद खाज की तरह खुजलाती है
अंतःवस्त्र खोलकर
गुप्तांग दिखाती है
नंगे समय का यह नंगा सच है
ऊलजलूल सी पुरस्कार में गच है
इस बंद समय में कुछ खुलता है
उद्देश्यहीन भी उद्देश्य में झूलता है
फाटक के बाद दरवाजा
दरवाजे के बाद खिड़की
खिड़की के पल्ले बंद हैं
कली मधुकर और मकरंद हैं
अब तो कविता कातिक की कुतिया है
आलोचक उसपर लपलपाता कुत्ता है
सौन्दर्य पर ऊगा बदजात कुकुरमुत्ता है
अंधे समय का उदय होता प्रकाश है
पोएट्री मैनेजमेंट का बिग बॉस है
समय और सौन्दर्य से हैट कर खड़ी है
कविता किसी बिस्तर में पड़ी है
पुरस्कार की फूलझड़ी है ।
अनिल कुमार शर्मा
१४ / ०८ / २०१६
फफूंद की तरह उगे छन्दों में
उलझी हुई कविता
दाद खाज की तरह खुजलाती है
अंतःवस्त्र खोलकर
गुप्तांग दिखाती है
नंगे समय का यह नंगा सच है
ऊलजलूल सी पुरस्कार में गच है
इस बंद समय में कुछ खुलता है
उद्देश्यहीन भी उद्देश्य में झूलता है
फाटक के बाद दरवाजा
दरवाजे के बाद खिड़की
खिड़की के पल्ले बंद हैं
कली मधुकर और मकरंद हैं
अब तो कविता कातिक की कुतिया है
आलोचक उसपर लपलपाता कुत्ता है
सौन्दर्य पर ऊगा बदजात कुकुरमुत्ता है
अंधे समय का उदय होता प्रकाश है
पोएट्री मैनेजमेंट का बिग बॉस है
समय और सौन्दर्य से हैट कर खड़ी है
कविता किसी बिस्तर में पड़ी है
पुरस्कार की फूलझड़ी है ।
अनिल कुमार शर्मा
१४ / ०८ / २०१६
No comments:
Post a Comment