Tuesday, 26 August 2014

भगवान ने कहा
भगवान को बताने वाले ने सुना
उसके कान में खोंट था
जीभ में लोच था
कितना सुना
और कितना कहा
प्रश्न यह है कि -----
केवल वह अपने लिए सुना
कि औरों के लिए भी  सुना
या वह  सबके लिए सुना
और अपने लिए ही  कहा
यही सनातन सत्य है
जो फिट है   वह फिट रहना चाहता है
जो फिट नहीं बैठता है
वह फिट को हिट करना चाहता है
परम्परा में सनातन सत्य
प्रभावी का पक्ष है
फायदा वाला रूढ़ है
घाटा  वाला प्रगतिशील है
विजेता और विजित
शोषित और शोषक
एक ही सिक्के के दो पहलू है
एक चित है
तो दूसरा पट है
यही संकट है
कि दोनों पहलू एक साथ नहीं होते
साथ साथ नहीं पाते
साथ साथ नहीं खोते
भीड़ के भुलावे में भीड़ परेशान है
अकेला तो और परेशान है
ज़माने का ज़माने पर एहसान है
नयी समझ और नया ज्ञान है
चिड़िया उड़ नहीं पाती
चींटी चल नहीं पाती
बन्दर गाँछ पर लटका है
यह अहसास अभी टटका है
भगवान  अभी भगवान  वाले में अटका है
 ईश्वर होने और न होने के मध्य
सवाल का दायरा इतना बड़ा
 जहाँ कि भूख का कोई हल नहीं
दर्शन दृष्टान्त तर्क -वितर्क
कुर्सी चाटते जीभ की ध्वनि
जो जमीं का खाती है
और आसमान बतियाती है
पुष्टिभोग के बाद स्वाद बदलता है
चिरंतन की जड़ता है
यही सच  है खुदा !
भगवान होने या न होने के बहाने
आदमी आदमी पर पड़ता है
अनिल कुमार शर्मा



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