Monday, 25 August 2014

किस घर से किस घर की बात करूँ
एक उजड़ा है एक बना बनाया है
एक जन्म लिया तबसे भूखा है
एक पेट से ज्यादा खाया है
एक ब्रह्म है दूजा माया है
 जीवन क्या तू एक छाया है?
परितोष किसे कब क्यों है
दुःख कातर मन भी क्यों है
दिन है और रजनी है
साजन है और सजनी है
मन भटका है अवरोधों में
 ज्ञान दृष्टि और शोधों में
अब तो आकुल अंतर है
 जीवन जल प्रांतर है
 मन बिचलित तन बोझिल है
किस पर कितना विश्वास करूँ
किस घर से किस घर की बात करूँ ।
अनिल कुमार शर्मा  २५ /०८/२०१४/


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