सुनो कॉमरेडों
क्रांति के मतभेदों
तुम्हारे लाल झंडे के
कई टुकड़े हुए
हम रह गए
मात्र डंडे पकड़े हुए
अब क्रांति तुम्हे गरियाती है
भूख हाथी पर बैठ कर जाती है
कभी साइकिल चलाती है
लालटेन जलाती है
तीर धनुष चलाती है
कमल सूंघती और सुंघाती है
जनता से सरकार
और सरकार से जनता में
पकाती है खाती है
फूटपाथ पर
चक्कर लगाती है
अनिल कुमार शर्मा 10/07/2014
क्रांति के मतभेदों
तुम्हारे लाल झंडे के
कई टुकड़े हुए
हम रह गए
मात्र डंडे पकड़े हुए
अब क्रांति तुम्हे गरियाती है
भूख हाथी पर बैठ कर जाती है
कभी साइकिल चलाती है
लालटेन जलाती है
तीर धनुष चलाती है
कमल सूंघती और सुंघाती है
जनता से सरकार
और सरकार से जनता में
पकाती है खाती है
फूटपाथ पर
चक्कर लगाती है
अनिल कुमार शर्मा 10/07/2014
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