Tuesday, 15 July 2014

शून्यांक- त्रुटि
पोशाक अलग -अलग है
सिर्फ एक ही खूँटी है
सरकारी यन्त्र में भ्रस्टाचार
एक शून्यांक त्रुटि है
जो इसके हर पुर्जे में व्याप्त है
मानक के सापेक्ष सदा अपर्याप्त है
इस यंत्र में हम सभी यंत्रवत है
इतने संघर्षों के बाद भी
घर्षणविहीन जड़वत है
जो जिधर चल दिया चलता रहा
दोस्त तू जड़त्व में हाथ मलता रहा
इस विकासवाद की गर्मी से
मेरे सपनों का हिमालय पिघलता रहा
अब जर्जर दीवारों पर रंगीन पुट्टी है
लक्ष्य  और प्राप्ति के बीच
सिर्फ शून्यांक त्रुटि है
अनिल कुमार शर्मा 16/07/2014
 


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