लोगों को मैंने हँसते देखा रोते देखा
पैर पसारे सोते देखा
अपने -अपने में खोते देखा
इस दुनिया के कोने कोने में
रोज चीर -हरण होते देखा
गिरे हुए इंसानो के
कुकर्मों को होते देखा
दानवता को जीते देखा
मानवता को मरते देखा
हम किस खेत के मूली है
हम किस व्यवस्था के कुली है
जिसको ढोते रहते है
हम तो रोते रहते है
अनिल कुमार शर्मा १९/०७/२०१४
पैर पसारे सोते देखा
अपने -अपने में खोते देखा
इस दुनिया के कोने कोने में
रोज चीर -हरण होते देखा
गिरे हुए इंसानो के
कुकर्मों को होते देखा
दानवता को जीते देखा
मानवता को मरते देखा
हम किस खेत के मूली है
हम किस व्यवस्था के कुली है
जिसको ढोते रहते है
हम तो रोते रहते है
अनिल कुमार शर्मा १९/०७/२०१४
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