Wednesday, 11 December 2013

हवा हवा में तुम हवा बने हो
उसकी गलती की दवा बने हो
अरमानों को पाले बैठे हो
मधुर स्वप्न में ऐठें  हो
सुन लो रह कटीली है
महॅगाई  में सबकी जेबें ढीली है
बरसाती  मेढक उछल लिए
मौसम में अब आया पाला है
लुटेरा वही अब रखवाला है
उस कोठी की बात निराली है
भीतर भीतर भरी भरी
बाहर बाहर खाली है
तकदीर जहाँ पर बनती है
उकठे पेङों की डाली है
मरुभूमि में तुम झूल रहे हो
कागज के फूलों से फूल रहे हो
गंध हीन  आकर्षक हो
तीर विहीन तरकश हो
अजूबे करामात दिखने वाले
एक अनोखे सर्कस हो
हैम देख रहे तुम दिखा रहे हो
बातें नयी बता रहे हो
बिना चूल्हे के गरम तवा बने हो
हवा हवा में हवा बने हो

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