Friday, 20 December 2013

       नयी भूख

न्यूटन और आइंस्टीन की आत्माओं
तुमसे पूछता हूँ
तूने ऐसी कोई मशीन क्यों नहीं बनायीं
जिससे कि भूख न लगे
और टॉमस अल्वा एडिसन
तुम्हें क्या बतायें
तुम्हारे बनाये हुए बल्ब की रोशनी में
अँधेरे जलाते -बुझते हैं
जाने -अनजाने तुम लोगों नें
अपनें फार्मूलों से
 एक और नयी भूख गढ़ दी
मशीन नें आदमी की रोटी छीन ली
दिन पर दिन पेट बड़ा होता गया
आदमी आदमी होने की अस्मिता खोता गया
इस पेट के बाहर कई पेटों की परिधियाँ
भूख की योजना बनाती हैं
खाली अँतड़ियों का आँकड़ा जुटाती है
रोन्टजेन तुम्हारे एक्स -रे मशीन में
भूख का कोई चित्र नहीं आता
कि समाज कई तरह से भूखा है
असली भूख से नकली भूख बड़ी है
इसी की शांति की हरबड़ी है
विज्ञान के भूखे वैज्ञानिकों !
तुम्हारे फार्मूले और अन्वेषण
सुविधा के भूख में पचकर
नयी   तरीके की भूख गढ़ रही है
यह सदी नए दौर की भूख से गुजर रही है
                                     अनिल कुमार शर्मा

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