Monday, 16 February 2015

हे शिव आपने
अपनी नगरी में आये
याचक भस्मासुर को
पुनः  वही वरदान दे दिया
सत्ता मोहिनी के प्रेम में
वह  प्रफुल्लित  नाच रहा है
 जगह जगह वही वरदान बाच रहा है
हे शिव आप तो अवढरदानी  है
स्वयं ही  आग है पानी है 
जगत  की रवानी है
मोहिनी के नृत्य का
कब पूरा रस्म होगा
यह भस्मासुर
कब भस्म होगा ।
अनिल कुमार शर्मा
शुभ शिवरात्रि
17/02/2015

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