अपने आदमी की शक्ल के भीतर
ढूंढता हूँ उस आदमी के रूह को
जिसमे संक्रमण का दौर है
आत्मा और परमात्मा के बीच का आदमी
क्यों अपनी आदमियत खो दिया
तमाम धर्मो का अमरबेल बो दिया
जो आदमी के रस को चूसकर
हरा भरा स्वरुप पाया है
खोखले आदमी के ऊपर छाया है
क्या यही परम पुरुष की माया है ?
अनिल कुमार शर्मा
25/02/2015
ढूंढता हूँ उस आदमी के रूह को
जिसमे संक्रमण का दौर है
आत्मा और परमात्मा के बीच का आदमी
क्यों अपनी आदमियत खो दिया
तमाम धर्मो का अमरबेल बो दिया
जो आदमी के रस को चूसकर
हरा भरा स्वरुप पाया है
खोखले आदमी के ऊपर छाया है
क्या यही परम पुरुष की माया है ?
अनिल कुमार शर्मा
25/02/2015