Thursday, 20 February 2014

मेरे सवालो के सच
सच में ये बता
तुझे कितने जबाब मिलते हैं
जो सही में सच है
घास में दुबके लोग
जो सच तो देखते हैं
किन्तु कहते नहीं हैं
क्योंकि उनकी भाषा में
विचारधारा के पुट नहीं मिलते
किसी के मुँह में निवाला नहीं गया
तो उसका पेट खाली है
और परिभाषा में वह भूखा है
दो मुट्ठी अनाज का जुगाड़ न करके
अर्थव्यवस्था की खामी में
उसकी भूख को फिट करना
एक तरह का समाजवाद है
जहाँ जिनके पेट भर चुके हैं
वहाँ वे जुगाली करते हैं
कभी -कभी अनशन के लिए
चर्बी वाले अपना पेट खाली करते है ।

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