मेरे सवालो के सच
सच में ये बता
तुझे कितने जबाब मिलते हैं
जो सही में सच है
घास में दुबके लोग
जो सच तो देखते हैं
किन्तु कहते नहीं हैं
क्योंकि उनकी भाषा में
विचारधारा के पुट नहीं मिलते
किसी के मुँह में निवाला नहीं गया
तो उसका पेट खाली है
और परिभाषा में वह भूखा है
दो मुट्ठी अनाज का जुगाड़ न करके
अर्थव्यवस्था की खामी में
उसकी भूख को फिट करना
एक तरह का समाजवाद है
जहाँ जिनके पेट भर चुके हैं
वहाँ वे जुगाली करते हैं
कभी -कभी अनशन के लिए
चर्बी वाले अपना पेट खाली करते है ।
सच में ये बता
तुझे कितने जबाब मिलते हैं
जो सही में सच है
घास में दुबके लोग
जो सच तो देखते हैं
किन्तु कहते नहीं हैं
क्योंकि उनकी भाषा में
विचारधारा के पुट नहीं मिलते
किसी के मुँह में निवाला नहीं गया
तो उसका पेट खाली है
और परिभाषा में वह भूखा है
दो मुट्ठी अनाज का जुगाड़ न करके
अर्थव्यवस्था की खामी में
उसकी भूख को फिट करना
एक तरह का समाजवाद है
जहाँ जिनके पेट भर चुके हैं
वहाँ वे जुगाली करते हैं
कभी -कभी अनशन के लिए
चर्बी वाले अपना पेट खाली करते है ।
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