Thursday, 15 June 2017

तुम्हारी मोहब्बत है
बासी अख़बार की तरह
कसमे -वादे है
अपनी सरकार की तरह
एक शिगूफा है
और सनसनी है
सिर्फ अंगुली तनी है
हाथ खाली है
कारोबार जाली है
कंगाली में आटा गीला है
कोई पेंच ढीला है
चेहरा रोबीला है
अंदाज़ रंगीला है
विकास का धंधा है
गाय का बंदा है
धर्म का फंदा है
स्वच्छता अभियान में
कही कुछ गन्दा है
अब आंकड़े नायब हैं
रोजगार गायब है
नाव की दिशा है
बिना पतवार की तरह
तुम्हारी मोहब्बत है
बासी अख़बार की तरह
अनिल कुमार शर्मा
15/06/2017

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