Sunday, 21 June 2015

ठगयोग अन्धकारिका 
यम नियम को गोली मारो
नहीँ नेति ,धौति ,वस्ति है
सत्ताभोगियों की यौगिक मस्ती है
सत्तासन से सिंघासन तक
घोटालासन से भ्रष्ट -आसन तक
वातानुकूलित कमरो में भ्रष्ट-अयाम करते हैं
सम्भोग से समाधि तक पढ़ते है
सम्भोग से ब्याधि में मरते है
चमचासन से नेतासन तक
दरिद्रमुद्रा से धनासन तक
धोखासन और ठगासन
जनता तुम्हें सिर्फ शवासन है
भ्रष्टभाँति भ्रष्टलोम विलोम
ठगबंधक्रिया ठगात्मक आचार 
विलासी जीवन नीच विचार
सत्तासुख के मधुरस भोगी हैं
योगी नहीं सब ठगयोगी हैं
अनिल कुमार शर्मा
२१/०६/२०१५

No comments:

Post a Comment