Thursday, 11 September 2014

कभी मेरे सीने में दिल हुआ करता था
और उछलता था बहुत तेज
प्यार के छींटे पर
फिसलता था बहुत  तेज
मैं तो फिसला
और प्यार भी फिसल गया
दिल को इतना मसल गया
अब तो बस धड़कने है शेष
कुछ प्यार के प्यारे अवशेष
कभी -कभी पुराने घाव की तरह
प्यार की पुरवाई में हरे होते है
इस उम्र के किसी कोने में
उस सुनहरे ख़्वाब में  खोते है
अनिल कुमार शर्मा
12/09/2014

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