कभी मेरे सीने में दिल हुआ करता था
और उछलता था बहुत तेज
प्यार के छींटे पर
फिसलता था बहुत तेज
मैं तो फिसला
और प्यार भी फिसल गया
दिल को इतना मसल गया
अब तो बस धड़कने है शेष
कुछ प्यार के प्यारे अवशेष
कभी -कभी पुराने घाव की तरह
प्यार की पुरवाई में हरे होते है
इस उम्र के किसी कोने में
उस सुनहरे ख़्वाब में खोते है
अनिल कुमार शर्मा
12/09/2014
और उछलता था बहुत तेज
प्यार के छींटे पर
फिसलता था बहुत तेज
मैं तो फिसला
और प्यार भी फिसल गया
दिल को इतना मसल गया
अब तो बस धड़कने है शेष
कुछ प्यार के प्यारे अवशेष
कभी -कभी पुराने घाव की तरह
प्यार की पुरवाई में हरे होते है
इस उम्र के किसी कोने में
उस सुनहरे ख़्वाब में खोते है
अनिल कुमार शर्मा
12/09/2014
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