Tuesday, 27 May 2014

गली के मोड़ पर दो कुत्ते भौक रहे थे
एक घूरे पर से आया था
दूसरा मंदिर के नाबदान से आया था
पहला मुर्गे की टाँग मुँह में दबाया था
दूसरा शिवाले का बहा दूध पी कर आया था
पहला खुद को सेक्युलर बताते हुए
दूसरे पर कम्युनल का आरोप लगाया था
दोनों आपस  में खूब भौंक रहे थे
शेष कुत्ते चौंक रहे थे
एक गधे के समझ में कुछ नहीं आया
वह बस रेंकने लगा
कुत्ता भौंकना  छोड़कर उसे देखने लगा
शेष कुत्ते समझ गए
गधा समझदार है
इसकी बातें वजनदार है
लगता है अभी यह सच्चा है
इन दोनों भौकने वालों से अच्छा है
शेष घबराये कुत्ते गधे पर चढ़ गए
गधे के साथ कुछ दूर तक बढ़ गए
यह देखकर और जानवर साथ आ गए
पूरे जंगल में छा गए
दोनों कुत्तो का विश्वास खा गए
गधा शिवाले की घास चर रहा है
अब समय गुजर रहा है

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