शून्यवाद
मैं अपने निहायत शून्य से परेशान हूँ
तुम एक के बाद नित्य प्रतिनित्य
एक दो शून्य रखते जा रहे हो
मैं सदा शून्यपति हूँ
तुम आज हजारपति हो
कल लखपति हो
परसों करोड़पति हो
आगे अरबपति हो खरबपति हो
मैं शून्य में शून्य जोड़ता हूँ
शून्य में शून्य का गुड़ा भाग करता हूँ
शून्य से शून्य घटाता हूँ
बस सिर्फ शून्य और शून्य पाता हूँ
शून्य खाता हूँ शून्य पीता हूँ
शून्य जीता हूँ
तुम किसी संख्या के बाद
शून्य पर शून्य रखते जाते हो
मेरा शून्य झोपड़ी से हवा हो जाता है
तुम्हारा शून्य महल बनकर इतराता है
मै कहता हूँ ईश्वर शून्य है
तुम कहते हो ईश्वर किसी संख्या के बाद
अनन्त शून्यों की कतार है
सत्य यह है कि ----
मेरा भी शून्य झूठ है
तेरा भी शून्य झूठ है
किन्तु मेरे शून्य में विपन्नता है
तुम्हारे शून्य में सम्पन्नता है
तुम्हारा अनंत होता शून्यवाद
ब्रह्मवाद ,मायावाद ,बाज़ारवाद का उदारवाद
संख्याओ के मिश्रण से बड़ा प्रभावकारी है
मेरा विशुद्ध शून्यवाद शून्य होते हुए
एकदम शून्यकारी है
अनिल कुमार शर्मा
३० /०५/२०१४/ ( कंगाल होता जनतंत्र से )
मैं अपने निहायत शून्य से परेशान हूँ
तुम एक के बाद नित्य प्रतिनित्य
एक दो शून्य रखते जा रहे हो
मैं सदा शून्यपति हूँ
तुम आज हजारपति हो
कल लखपति हो
परसों करोड़पति हो
आगे अरबपति हो खरबपति हो
मैं शून्य में शून्य जोड़ता हूँ
शून्य में शून्य का गुड़ा भाग करता हूँ
शून्य से शून्य घटाता हूँ
बस सिर्फ शून्य और शून्य पाता हूँ
शून्य खाता हूँ शून्य पीता हूँ
शून्य जीता हूँ
तुम किसी संख्या के बाद
शून्य पर शून्य रखते जाते हो
मेरा शून्य झोपड़ी से हवा हो जाता है
तुम्हारा शून्य महल बनकर इतराता है
मै कहता हूँ ईश्वर शून्य है
तुम कहते हो ईश्वर किसी संख्या के बाद
अनन्त शून्यों की कतार है
सत्य यह है कि ----
मेरा भी शून्य झूठ है
तेरा भी शून्य झूठ है
किन्तु मेरे शून्य में विपन्नता है
तुम्हारे शून्य में सम्पन्नता है
तुम्हारा अनंत होता शून्यवाद
ब्रह्मवाद ,मायावाद ,बाज़ारवाद का उदारवाद
संख्याओ के मिश्रण से बड़ा प्रभावकारी है
मेरा विशुद्ध शून्यवाद शून्य होते हुए
एकदम शून्यकारी है
अनिल कुमार शर्मा
३० /०५/२०१४/ ( कंगाल होता जनतंत्र से )