Saturday, 13 May 2017

वह जो गोद में दूध पिलाते हुए
चूल्हे के आगे रोटी बनाती है
एक हाथ से  बच्चे को खिलाती है
दूसरे हाथ से सब्जी चलाती है
वह माँ है जो घर को चलाती है
गिरते हुए बच्चे को उठाती है
सहलाती है दुलराती है
जगाती है सुलाती है
लोरी और कहानी सुनाती है
जवानी और बुढ़ापे को माँ
तुम्हारी याद बचपन बनाती है
मेरे लिए कितने मन्नते मनाती है
किसी की नज़र न लगे
आँचल में छुपाती है
इस नन्ही सी दुनिया में
मेरी माँ ही अरमान सजाती है
रिस्ते बहुत से बनेगे बिगड़ जायेंगे
किन्तु माँ हम तुम्हारे पास ही आएंगे
तुम्हारे आँचल से बिछड़ कर कहाँ जायेंगे |
अनिल कुमार शर्मा
१४/०५/२०१७



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