मेरा भारत इतिहास में अपवाद है
पहले भी जातिवाद था
आज भी जातिवाद है
पहले ब्राह्मणवाद था
अब दलितवाद है
अगड़ा और पिछड़ा है
एक विचित्र झगड़ा है
अल्पसंख्यक में बहुसंख्यक
और बहुसंख्यक में अल्पसंख्यक
शीरे में जलेबी की तरह गड़ा है
कड़ाही और छनौटा पड़ा है
भट्ठी सुलग रही है
कोई नयी आग लग रही है
हवा भी ठग रही है
आदमी से औवल जात है
संवैधानिक करामात है
जाति ही जीती है
जाति ही मरती है
जिसमे राजनीति चरती है
अब इंसानियत डरती है
अब यहाँ बंजर है और परती है
अनिल कुमार शर्मा
24/10/2015
पहले भी जातिवाद था
आज भी जातिवाद है
पहले ब्राह्मणवाद था
अब दलितवाद है
अगड़ा और पिछड़ा है
एक विचित्र झगड़ा है
अल्पसंख्यक में बहुसंख्यक
और बहुसंख्यक में अल्पसंख्यक
शीरे में जलेबी की तरह गड़ा है
कड़ाही और छनौटा पड़ा है
भट्ठी सुलग रही है
कोई नयी आग लग रही है
हवा भी ठग रही है
आदमी से औवल जात है
संवैधानिक करामात है
जाति ही जीती है
जाति ही मरती है
जिसमे राजनीति चरती है
अब इंसानियत डरती है
अब यहाँ बंजर है और परती है
अनिल कुमार शर्मा
24/10/2015
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