Monday, 3 November 2014

यह हिंदी  मुझसे बात करती है
जैसे सास और ननद मिलकर
नयी  बहू से घात करती  है
बहू की सुरीली गीत
नयी नवेली  प्रीत
पिया मिलन की रात
नयी तरह की बात
हिंदी सास ननद को खटकती है
मंच पर माथा पटकती है
 रिश्तों की डोरी चटकती है
कविता की मंडी में मंदी है
तमाम तरह की गोलबंदी है
फिर भी कुछ जुगलबंदी है
एक बूढ़ा  अपनी हड्डी बजाता है
कुसुमित कपोलों पर कंकाल घुमाता है
समय खायी जीभ मोहर है
हिंदीवाला गाता सोहर है
बहू की निकलती  आह है
यह कैसी  सौतिया डाह है
अनिल कुमार शर्मा
04/11/1972

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