Saturday, 22 November 2014

अब तो  अजीब संत है
जो समस्या अनंत है
भगवान टोकरी में है बोरे में है
भक्त अन्धविश्वास के डोरे में है
बहुत कुछ पाखंड में पगे
सद्वचन के ढिढोंरे में है
सद्वाक्य ओढ़ कर कसाई
भेड़ पालता है
उसे जबह करने के लिए
उपदेश भरा चारा डालता है
झाशाराम है ठगीशंकर है
बम है बन्दुक है बंकर है
व्याख्या में आदिगुरु कोई शंकर है
ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या है
शिष्य से ज्यादा शिष्या है
विलासिता में सजी तपस्या है
अब गुरुघंटाल कानून से ऊपर है
यह तकनीकी बड़ी सुपर है
जनता भक्त है
बाबा और नेता के आगे
अशक्त है
भगवान बेचनेवाले
सत्ता से सशक्त है
मार खाते भोले भाले भक्त है
पाखंड से धर्म अशक्त है
अनिल कुमार शर्मा
22/11/2014

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