Friday, 7 March 2014

अंडा बोलता है
हज़ार बेईमानों में एक ईमानदार है
जो चोर -सिपाही वाली सरकार का सरदार है
इमरजेंसी की  बहु का   पक्षकार है
जो हज़ार छेदों वाली जर्जर नाव को खे रही है
और अंडा से रही है
अंडा कभी -कभी बोलता है
विचित्र रहस्य खोलता है
यह जन आंदोलन जो पसरा है
इससे  संसदीय प्रणाली को खतरा है
जनता की आवाज संसद से नीचे है
इस  चमन को  मेरे खानदान ने सींचे है
बांग्लादेश के  निर्माण में मेरे  परिवार का हाथ है
पूरा  देश हमारे साथ है
यह जन आंदोलन तो
संसदीय लोकतंत्र के साथ विस्वासघात है
भूखसान  पर बैठे योगासन वाले पर
आधी रात को लाठी चल गयी
यह बात पूरे  देश को खल गयी
योगी तरुणी के पोशाक में ढल गया
दुप्पट्टे में मुँह छिपाकर  निकल गया
मुझे भ्रम था योगी आत्मत्यागी है
महा विरागी है
नहीं जानता था इतना  आत्मानुरागी है
नाव मजधार में है
गड़बड़ी पतवार में है
तूफ़ान का अंदेशा है
मांझी का हाथ रस्सी में कसा है
लंगर अंडा में फंसा है
परिंदे पिजरे में बंद है
उनके चोंच में चारा है
यह देश बेचारा है
एक अदद ख़ानदान का सहारा है
अनिल कुमार शर्मा

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