न नर है न नारी है
मामला अखबारी है
न घर है न दरबारी है
राज काज सरकारी है
किसी की जमीन उठती है
तो कोई ज़मीन से उठता है
कोई आसमान से टपककर
सीधे ज़मीन पर गिरता है
कोई घेरता है तो कोई घिरता है
कोई धारा के साथ बहता है
तो कोई धारा को चीरता है
कोई मूर्ति लगाता है
तो कोई मूर्ति हटाता है
कोई ठगता है तो कोई ठगाता है
किसी का बाज़ा बजता है
तो कोई बाज़ा बजाता है
कोई डरता है तो कोई डराता है
कोई हारता है तो कोई हराता है
जनता की सरकार को जनता से छीनकर
कई कोठरियों और तिजोरिओं में भरकर
विकासग्रस्त बनाकर उड़नछू होते जाओ
दोस्तों में घुसकर दुश्मनी बोते जाओ
किसी का सूरज उगता है तो किसी का अस्त है
इस दौर में हम सभी विकासग्रस्त हैं
अनिल कुमार शर्मा
08/03/2018
मामला अखबारी है
न घर है न दरबारी है
राज काज सरकारी है
किसी की जमीन उठती है
तो कोई ज़मीन से उठता है
कोई आसमान से टपककर
सीधे ज़मीन पर गिरता है
कोई घेरता है तो कोई घिरता है
कोई धारा के साथ बहता है
तो कोई धारा को चीरता है
कोई मूर्ति लगाता है
तो कोई मूर्ति हटाता है
कोई ठगता है तो कोई ठगाता है
किसी का बाज़ा बजता है
तो कोई बाज़ा बजाता है
कोई डरता है तो कोई डराता है
कोई हारता है तो कोई हराता है
जनता की सरकार को जनता से छीनकर
कई कोठरियों और तिजोरिओं में भरकर
विकासग्रस्त बनाकर उड़नछू होते जाओ
दोस्तों में घुसकर दुश्मनी बोते जाओ
किसी का सूरज उगता है तो किसी का अस्त है
इस दौर में हम सभी विकासग्रस्त हैं
अनिल कुमार शर्मा
08/03/2018
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