Friday, 26 December 2014

यह अजीब प्रयत्न है
मेरा देश भारत है
और उसमे भारत रत्न है
कुछ मुर्दे है कुछ जिन्दे है
कुछ चोंच वाले है
कुछ पर कटे परिंदे है
अब हताश जिंदगी के उदास सवाल
कब्र सजाकर अभिभूत है
सत्ता के सन्दर्भ में
वर्तमान में कुछ भूत है
भविष्य का सबूत है
मृतप्राय वर्तमान के जीवंत अतीत
प्रतिमान के प्रश्न में
 मूल्यबोध का रूपांतरण
 संदिग्ध आयाम के उत्तर में
एक अनरवत प्रश्न गढ़ रहा है
 जिसे बदलते समय के साथ
 बदलता समय पढ़ रहा है
अनिल कुमार शर्मा 26/12/2014

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