कुछ बदतर लोगो की बेहतर जिंदगी
और तमाम बेहतर लोगो की बदतर जिंदगी
बीज से पनप कर वृक्ष बनती समस्याएं
और समस्याओं का व्यापार करते लोग
अब तो ठगों का बाजार चमक रहा है
विकास का अवशिष्ट महक रहा है
अब तो सब कुछ बिक सकता है
और सब कुछ ख़रीदा जा सकता है
वे तो नरक का कष्ट बेचकर
स्वर्ग का टिकट खरीदते हैं
कुछ पेट के लिए तो कुछ टेंट के लिए
मजबूर होकर सब कुछ बेचते है
कुछ लोग स्वभाव से ही बिकाऊ होते हैं
सड़ -गल कर किसी तरह बिक जाते है
कुर्सी के इर्द-गिर्द गन्दगी जैसे टिक जाते हैं
फिर भी कैसा संयोग है
ये माननीय लोग हैं |
--------------------------अनिल कुमार शर्मा
१२ /०१ २०१९
और तमाम बेहतर लोगो की बदतर जिंदगी
बीज से पनप कर वृक्ष बनती समस्याएं
और समस्याओं का व्यापार करते लोग
अब तो ठगों का बाजार चमक रहा है
विकास का अवशिष्ट महक रहा है
अब तो सब कुछ बिक सकता है
और सब कुछ ख़रीदा जा सकता है
वे तो नरक का कष्ट बेचकर
स्वर्ग का टिकट खरीदते हैं
कुछ पेट के लिए तो कुछ टेंट के लिए
मजबूर होकर सब कुछ बेचते है
कुछ लोग स्वभाव से ही बिकाऊ होते हैं
सड़ -गल कर किसी तरह बिक जाते है
कुर्सी के इर्द-गिर्द गन्दगी जैसे टिक जाते हैं
फिर भी कैसा संयोग है
ये माननीय लोग हैं |
--------------------------अनिल कुमार शर्मा
१२ /०१ २०१९
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