Sunday, 25 March 2018

अनशनबाज़ी
किसी के लिए भूख समस्या है
तो किसी के लिए समाधान है
भरे पेट वाले भूख का अभ्यास करते है
भूखे लोग पेट भरने का प्रयास करते है
भूख के कई आकार और प्रकार है
किसी के लिए यह हथियार है
किसी के लिए धंधा व्यापार है
भूख डराती है
जिताती और हराती है
पापी पेट का सवाल है
दंगा और बवाल है
भूख लगती है और लगायी जाती है
इससे समस्या बुलाई और भगायी जाती है
किसी को भूख लगती है तो खाना मांगता है
किसी को भूख लगती है तो दिल्ली भागता है
जैसे दंगा फसाद का मौसम होता है
वैसे ही भूखबाज़ी का मौसम होता है
जन समस्याओं को खाता हुआ वह आदमी
एक जबरदस्त भूख गढ़ रहा है
भूख से लड़ रहा है
उसके लिए यह आज़ादी आधी है
गज़ब का अनशनबाज़ी है
अनिल कुमार शर्मा
२६//०३/२०१८

Thursday, 8 March 2018

न नर है न नारी है
मामला अखबारी है
न घर है न दरबारी है
राज काज  सरकारी है
किसी की जमीन उठती है
तो कोई ज़मीन से उठता है
कोई आसमान से टपककर
सीधे ज़मीन पर गिरता है
कोई घेरता है तो कोई घिरता है
कोई धारा के साथ बहता है
तो कोई धारा को चीरता है
कोई मूर्ति लगाता है
तो कोई मूर्ति हटाता है
कोई ठगता है तो कोई ठगाता है
किसी का बाज़ा बजता है
तो कोई बाज़ा बजाता है
कोई डरता है तो कोई डराता है
कोई हारता है तो कोई हराता है
जनता की सरकार को जनता से छीनकर
कई कोठरियों और तिजोरिओं में भरकर
विकासग्रस्त बनाकर उड़नछू होते जाओ
दोस्तों में घुसकर दुश्मनी बोते जाओ
किसी का सूरज उगता है तो किसी का अस्त है
इस दौर में हम सभी विकासग्रस्त हैं
अनिल कुमार शर्मा
08/03/2018