Sunday, 2 August 2015

मेरे दोस्त जो दुश्मन बन गए हो
आओ फिर से वही दोस्ती निभाओ
और सदा के दुश्मनो तुम भी
अपनी दुश्मनी दोस्ती में भुलाओ
चन्द लम्हे जो कंटीले रह गए
उनको भी गमकते से फूल बनाओ
कहीं तो क्लेश होता है
इन  टूटे दिलों के कोने में
जीतनी ख़ुशी होती है पाने में
उससे ज्यादा गम होता है खोने में
एक एक लम्हा गुजर जाता संजोने में
यह तो महज़ एक चुभती सी टीस है
जिसे मैंने पा कर खो दिया
दोस्त तेरी दुश्मनी पर रो दिया
अनिल कुमार शर्मा
०२/०८/२०१५

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