यह दुनिया है
और दोस्त इस दुनिया में दुःख है
सवाल यह है कि
इस दुःख को कैसे काटा जाये
इसे किस तरह बांटा जाये
जीवन के सन्दर्भ में इच्छाएं जीती हैं
तथागत !यह मोक्ष भी एक इच्छा है
जीवन के आयाम की बृहत्तर इच्छा
इन सब दुखों से पार जाने का दुःख
कितना आनंद देता है
जीवन का अतिक्रमण
काल कुंचित देह से हटकर
विदेह की परिणति में
एक सजग निर्लिप्त प्रवाह
मोहता है मोह को
आत्मविवेचना के परे
वही है दुःख
अनंत सुखों को समेटे हुए
आशा तृष्णा से दूर
विशुद्ध आत्मा में
स्वयं परमात्मा में ।
अनिल कुमार शर्मा
21/08/2015
और दोस्त इस दुनिया में दुःख है
सवाल यह है कि
इस दुःख को कैसे काटा जाये
इसे किस तरह बांटा जाये
जीवन के सन्दर्भ में इच्छाएं जीती हैं
तथागत !यह मोक्ष भी एक इच्छा है
जीवन के आयाम की बृहत्तर इच्छा
इन सब दुखों से पार जाने का दुःख
कितना आनंद देता है
जीवन का अतिक्रमण
काल कुंचित देह से हटकर
विदेह की परिणति में
एक सजग निर्लिप्त प्रवाह
मोहता है मोह को
आत्मविवेचना के परे
वही है दुःख
अनंत सुखों को समेटे हुए
आशा तृष्णा से दूर
विशुद्ध आत्मा में
स्वयं परमात्मा में ।
अनिल कुमार शर्मा
21/08/2015