Sunday, 9 October 2016

वो तो देश के लिए जान देते है
और देश के लिए जान लेते है 
ये तो देश के जांबाज बेटे हैं 
देश के कोने से कोई पूछता है 
लिए गए और दिए गए 
जानों की गिनती 
तो गज़ब का देशद्रोह है 
देश के भीतर कोई खोह है 
जिससे देश वालों को खतरा है 
कितना अविश्वास पसरा है ?
घोसले में से निकलकर परिंदा 
ठूँठ पर बैठा है 
किसी विरासत पर ऐंठा है 
अब तो ख़बरों में बजती हुई तालियां
गिनी जाती है
गरीबो की थालियां छीनी जाती है
अब जनता अशक्त है
क्योकि देश में स्वघोषित
देशभक्त हैं ।
अनिल कुमार शर्मा
१०/१०/२०१६