Tuesday, 28 April 2015

इस दुःख के बाद
और क्या दुःख होगा
नष्ट जिंदगी की ये तस्वीरें
जहाँ जीवन एक वीरान  है
घोसले  उजड़ गये
परिंदे हलकान हैं
जमीन वही है
बसेरा ढह गया
दर्द की कहानी
कोई  कहर कह गया
दिन की दहसत
सारी रात बढ़ती है
दुःख की बादल
आसमान चढ़ती है
प्रभु ये कैसी लीला है
कंगाली में आटा गीला है
अनिल कुमार शर्मा
28 /04 /2015